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ठोस कदम, ठूस नियोजन

(विमुद्रीकरण पर मेरे किसी भी प्रकार से राजनीतिक या अर्थ व्यवस्था सम्बंधित ठोस विचार नहीं हैं, और ना ही मेरा किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव या लगाव है। ये व्यंग्य विमुद्रीकरण के नियोजन एवं प्रबंधन के लिए की गयी तैयारी का मात्र एक काल्पनिक चित्रण है.)

मोदी: : भाइयों,आज आपको यहां कुछ ख़ास काम और एक गोपनीय operation के लिए मैंने यहां इकठ्ठा किया है।

उर्जित, जब रघुराम राजन था तब हम ये नहीं कर पाए, पर हमें तुमसे पूरी उम्मीद है कि कर पाएंगे!

उर्जित: (उत्सुकता से आगे बढ़ते हुए) जी जी! कहिये मोदी जी, क्या करना है?

मोदी: उत्तेजित मत होओ, उर्जित

उर्जित: जी मोदी जी

मोदी: मित्रों हमें काले धन के लिए कुछ करना है. ये बहुत सारे अर्थशास्त्री आकर जब देखो कुछ बोलते रहते हैं। ये ५०० और १००० के नोटों को हटा ही दें क्या?

जेटली: Great idea, Modi ji. मैंने ये एक मुकेश घाटिया नाम के महानुभाव का एक ट्वीट भी देखा था पिछले साल जब उसने कहा था की १००० के नोट किसी काम के नहीं हैं। ये देखिये। (laptop पर tweet दिखाते हुए)

उर्जित:  Definitely very good idea Modi ji. हमें हमारी इकोनॉमिक्स की पहली किताब में भी सिखाया गया था कि ये एक तरीका है काले धन को हटाने का। It is called demonetisation.

मोदी: क्या कहा तुमने de-modi-tisation? इसीलिए लेके आये हैं हम तुमको?

उर्जित: नहीं नहीं सर। De-mone-tisation. यानी की पैसे को हटाना।

जेटली: उर्जित ठीक कह रहे हैं। हिंदी में यह कहलाता है विमुद्रीकरण।

मोदी: क्या? वि-मोदी-करण? तुम्हारी दूकान बंद करनी ही पड़ेगी लग रहा है?

जेटली: अरे मोदी जी! वि-मुद्री-करण ! यानी कि मुद्रा को हटाना!

मोदी: खैर छोडो ये सब। आप दोनों अब मन की बात छोड़ काम की बात पर आइये

जेटली , उर्जित: जी सर

मोदी: क्या करें हटा दें ये नोट?

जेटली: हाँ सर हटा देते हैं . मैं तो वैसे भी ये सब कॅश अपने इंडियन अकाउंट में रखता नहीं हूँ. उर्जित तो अभी अभी गवर्नर बना है, उसके पास तो कुछ होगा भी नहीं. क्यों उर्जित?

उर्जित: (सोचते हुए) हाँ हाँ बिलकुल. कुछ कर लूंगा मैं थोड़े दिन में. दिवाली हो जाने दीजिये, मैं अपने आपको दिवाला बना लूंगा इतने दिन में, और बस फिर हम अटैक कर सकते हैं.

जेटली, उर्जित: तो सर हमें कोई तकलीफ नहीं है.

उर्जित: अच्छा लगा आपने हमसे पूछा. You are a true democratic leader sir.

मोदी: अरे democratic की बात मत करो। मुझे गुप्त सूत्रों से पता चला है कि अमेरिका में democratic वाली हारने वाली है इस बार।

पर ये सही है सालों, तुमने अपना तो सोच लिया मेरे बारे में कुछ सोचना उचित नहीं समझा?

जेटली: सर सोचना तो छोटी मछलियों को ही पड़ता है ये सब के बारे में। आपकी तो सेटिंग अलग ही लेवल की होती है।

मोदी: हा हा हा ! ये तो तुमने सही कहा जेटली। मैंने अपना पहले ही सोच रखा है। खैर, मुद्दे पे आते हैं फिर से। तो कर दी जाए ये सर्जिकल स्ट्राइक?

जेटली, उर्जित: जी सर, जी सर।

उर्जित: पर दिवाली के बाद, प्लीज।

मोदी: हाँ हाँ चल ठीक है। हो सकता है प्रजा भी भड़क जाए और दिवाली में हमारा बम फोड़ दे अगर दिवाली के पहले किया तो।

उर्जित: सर इसी बात से याद आया की थोड़ा प्रजा का भी सोच लेते हैं, कि क्या असर पड़ेगा उन पर?

मोदी: अरे हाँ, अच्छा याद दिलाया। सीखो इससे कुछ जेटली! कल का छोरा कितनी राजनीतिक समझ रखता है।

जेटली: (सर हिलाते हुए)

मोदी: मित्रों, अब आज की सभा यहीं समाप्त करते हैं। आप लोग कल कोई योजना बनाके लाइए। हम चर्चा करते हैं इस पर और निर्णय लेते हैं।

जेटली: सर, आज ही कर लें क्या? कल ज़रा दिवाली शॉपिंग के लिए फ्रांस जाना था .

उर्जित: कल ज़रा मुझे भी घर की सफाई करनी है दिवाली की। आप तो जानते ही हैं बीवी की बोली और बन्दुक की …

मोदी: (गुस्से में देखते हुए)

उर्जित: सॉरी सर, आप नहीं जानते, पर जानते तो हैं ही . अ म म .. मतलब मैं . .

जेटली: और फिर सर, इस में हमें ज़्यादा समय थोड़े ही लगेगा . १५ मिनट से ज़्यादा नहीं लगने चाहिए. क्यों उर्जित?

उर्जित: Yes, 15 minutes. Tops.

मोदी: ठीक है चलो।  १५ मिनट में ख़तम करो ये सब। मुझे क्राइम पेट्रोल से कुछ dialogue delivery सीखनी है।

उर्जित: सर, मुझे लगता है कि जब भी हम ये announce करें तो उसके बाद हमें ज़्यादा टाइम नहीं देना चाहिए। नहीं तो लोग काला धन इधर उधर लगा देंगे।

मोदी: बहुत बढ़िया! ऐसा ही करते हैं। इससे थोड़ी हलचल भी ज़्यादा मचेगी।

(जेटली फ़ोन पर कुछ करते हुए)

मोदी: भाई अरुण, व्हाट्सएप्प के फॉरवर्ड बाद में पढ़ लेना। अभी ज़रा देश के लिए नीति बना लो?

जेटली: अरे नहीं सर, बस अपने कुछ खास लोगों को बता रहा था कि वो  ज़रा अपने कॅश का कुछ जुगाड़ कर लें।

उर्जित: Good idea!  मैं भी बताता हूँ अपने गुज्जु व्यापारियों को।

मोदी: अरे मूर्खों! रखो फ़ोन नीचे! भाई इतने उचे पद पर हो तो गोपनीयता बनाये रखना भी सीखो कुछ। अभी तुमने बता दिया तो जब मैं announce करूँगा तब shock factor कैसे आएगा? और ये अमेरिका के चुनावों में भी थोड़ा ज़्यादा ध्यान जा रहा है जनता का। वो भी हटाना है।

तुम लोगों से कुछ होना जाना नहीं है। लगता है सब मुझे ही करना पड़ेगा। अच्छा ये नोट हटाएंगे तो कुछ नोट डालने भी तो पड़ेंगे? जितने नोट हटाएंगे उसके बराबर के १०० के नोट दाल देंगे, हो जाएगा, नहीं?

उर्जित: हाँ सर, हो जाएगा। पर सर,  शायद मशीन इतने नोट नहीं छाप पायेगी इतनी जल्दी। दस गुना नोट छापने पड़ेंगे न।

मोदी: ह्म्म्म। क्या करें फिर?

जेटली: सर, एक काम करते हैं, २००० के नोट छाप देते हैं नए। कम छापने पड़ेंगे।

मोदी: अरे वाह ! तुम तो बड़े शातिर हो अरुण! ठीक है ऐसा ही करते हैं।

उर्जित: पर सर, फिर  वही बात नहीं हो जायेगी? काल धन नए नोटों में होगा?

मोदी:  अरे मूर्ख, तो फिर हटा देंगे! हे हे हे।

जेटली: Masterstroke sir, masterstroke!

उर्जित: पर सर ये नए नोट छापेंगे तो लोगों को पता चल जाएगा। ख़ास तौर पर जब की नए नोट की डिजाईन बनायेगे।

मोदी: ओहो! क्या बात कर रहे हो यार! डिजाईन करना कौनसी बड़ी बात है? लाओ laptop, मैं डिजाईन कर देता हूँ photoshop में।

उर्जित: पर सर, २००० के नोट भी छापने में टाइम लगेगा, थोड़े कम से काम चला लें?

मोदी:  ह्म्म्म

जेटली: सर, एक काम करते हैं। कम नोट डालते हैं। आगे जाके cashless economy भी होनी चाहिए उसके लिए भी सही रहेगा।

मोदी:  ये बात! ये अच्छा है। चलो कोई बात प्रजा और आर्थिक व्यवस्था के लिए अच्छी वाली भी है।

उर्जित: सर, इससे महंगाई भी कम होगी! जब लोगों के पास पैसे ही नहीं होंगे तो खरीदेंगे क्या?

मोदी: बहुत अच्छे! ये योजना तो अच्छी से और अच्छी होती जा रही है।

जेटली: सर, मैंने देखा है कि कुछ लोग उचित कारणों से भी नकद रखते हैं अपने घरों में। जैसे कि मेरा driver.

मोदी: ह्म्म्म ! चलो ठीक है, उन लोगों के लिए पैसे बैंक में जमा कराने का प्रावधान कर देते हैं। ५०,००० की लिमिट ठीक रहेगी मेरे ख्याल से, क्यों?

जेटली: सर, ये तो बहुत कम है। मेरे ख्याल से ५ लाख होनी चाहिए।

मोदी: तुम अब जनता की सोचना छोड़ो! Final करते हैं। २.५ लाख बस। उसके ऊपर होने पर tax देना होगा।

उर्जित: सर, अचानक से नोट बंद करेंगे तो हो सकता है लोगों को तकलीफ आये?

मोदी: भाई, सोच तो लिया जनता का? तुम लोगों ने अपना देख लिया है, फिर हमने जेटली के driver का भी सोच लिया है . और फिर बचता ही क्या है? बाकी लोगों को थोड़ी आपत्ती होगी कुछ दिन. सब ठीक हो जाएगा थोड़े दिन बाद.

उर्जित: सर जिन लोगों के पास बैंक account नहीं हैं उनका क्या?

मोदी: तो बना लेंगे भाई, तुम्हारे बैंकों में टाइम लगता है क्या account बनाने में?

उर्जित: नहीं सर, बिलकुल नहीं.

जेटली: सर, उत्तर भारत में तो सारा काम नकद से ही होता है, और छुट्टे तो बड़ी मुश्किल से मिलते हैं पहले ही .

मोदी: यार अब आप लोग मुझे bore कर रहे हैं इन सब detail से.  वहाँ सैनिक इतनी विषम परिस्थितियों में जूझ रहे हैं देश के लिए, और तुम यहां आम आदमी की बात कर रहे हो? भाई,  ये सब final करके मुझे अब अपनी स्पीच तैयार करके दे दो . थोड़ा ५६” को चौड़ा करके  अच्छे से रु-ब-रु किया जाए लोगों से.

बहुत हो गयी ये planning. अब बस इसे क्रियान्वित करने का समय है .

अरे  समय तो क्राइम पेट्रोल का भी हो गया.

(विमुद्रीकरण पर मेरे किसी भी प्रकार से राजनीतिक या अर्थ व्यवस्था सम्बंधित ठोस विचार नहीं हैं, और ना ही मेरा किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव या लगाव है। ये व्यंग्य विमुद्रीकरण के नियोजन एवं प्रबंधन के लिए की गयी तैयारी का मात्र एक काल्पनिक चित्रण है.)

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